शनिवार, 21 मार्च 2020

बचपन

तितलियों के संग अठखेलियाँ करते,
फ़ूलों का झूला झूलते,
गम, मुसीबतों, चिंताओं से दूर
रहता है एक बचपन।

किलकारियों से भरी शरारत,
नटखट चेहरे की मासूमियत,
बातों में लड़कपन की तुतलाहट,
बरबस किसी को आकर्षित कर लेता है बचपन।

न किसी धर्म न किसी जात से वास्ता इसका,
न सांसारिक लोभ में डूबकर यह सिसकता,
फ़िर भी प्रेम की अमृत की
वर्षा करता है बचपन।

ज़िंदगी की भीड़ से दूर,
मजबूरियों तनावों से हो कर मुक्त
हर इंसान के जीवन में
आता है यह बचपन।

बचपन की निश्छल यादों को
भूल जाता है इंसान,
लम्हों के बीतते दौर में
कहीं खो जाता है बचपन। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें