मनुष्य के जीवन में कई उतार चढ़ाव आते ही रहते हैं। लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद उसे अपने जीवन की बाधाओं से जूझने की प्रेरणा देते हैं उसके सपने। सपने, जो कभी सच होते हैं तो कभी हमारे मन के एक कोने में दब कर रह जाते हैं। इन्हीं सपनों पर आधारित है मेरी यह कविता ‘हमारे सपने’—
बंद आँखें न जाने कितने सपने बुनती है,
हकीकत से दूर अपनी दुनिया को बसाती है।
सपना जो हर पल सबकी आँखों में सजता है,
झूठी आशाएँ जगाकर पल भर में विलुप्त हो जाता है।
ख्वाबों की दुनिया बड़ी हसीन होती है,
कभी आसमाँ के तारे तोड़ लाती है,
कभी स्वर्ग की खुशियाँ चुरा लाती है।
वादियों में उठता वो सफेद धुआँ,
सतरंगी रंगों से सजा समाँ,
खुशियों के सरगम की तान छेड़ती ज़िंदगी,
दूर तक साथ चलता एक साथी ,
मंज़िलों की पहुँच,
न जाने और कितनी ही तस्वीरें,
जिन्हें रंग जाती है सपने।
सपने जो यथार्थ की धरा पर नहीं बनते,
इंसान को कुछ पल का सुख देते, पर अपने नहीं बनते।
ज़रा सी आहट पर आँखें खुल जाती हैं
और सपना वहीं टूट जाता है।
ज़िंदगी की सच्चाई फ़िर सामने होती है,
और सपनों का घरौंदा बिखर जाता है।
सपने केवल सपने होते हैं,
दिखते हैं और फ़िर टूट जाते हैं।
मगर इन टूटे सपनों से एक नया स्वप्न जन्म लेता है,
और पंखों को उड़ान देता है।
हकीकत से दूर अपनी दुनिया को बसाती है।
सपना जो हर पल सबकी आँखों में सजता है,
झूठी आशाएँ जगाकर पल भर में विलुप्त हो जाता है।
ख्वाबों की दुनिया बड़ी हसीन होती है,
कभी आसमाँ के तारे तोड़ लाती है,
कभी स्वर्ग की खुशियाँ चुरा लाती है।
वादियों में उठता वो सफेद धुआँ,
सतरंगी रंगों से सजा समाँ,
खुशियों के सरगम की तान छेड़ती ज़िंदगी,
दूर तक साथ चलता एक साथी ,
मंज़िलों की पहुँच,
न जाने और कितनी ही तस्वीरें,
जिन्हें रंग जाती है सपने।
सपने जो यथार्थ की धरा पर नहीं बनते,
इंसान को कुछ पल का सुख देते, पर अपने नहीं बनते।
ज़रा सी आहट पर आँखें खुल जाती हैं
और सपना वहीं टूट जाता है।
ज़िंदगी की सच्चाई फ़िर सामने होती है,
और सपनों का घरौंदा बिखर जाता है।
सपने केवल सपने होते हैं,
दिखते हैं और फ़िर टूट जाते हैं।
मगर इन टूटे सपनों से एक नया स्वप्न जन्म लेता है,
और पंखों को उड़ान देता है।
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